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महाभारत 71.37

दुर्योधनो न ह्यलमद्य दातुं; जीवंस्तवैतन्नृपते कथंचित्
यत्ते पुरस्तादभवत्समृद्धं; द्यूते हृतं पाण्डवमुख्य राज्यम्

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