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महाभारत 70.78

प्रियश्च प्रियकामश्च गतिज्ञः सर्वकर्मणाम्
को हि कृष्णास्ति नस्त्वादृक्सर्वनिश्चयवित्सुहृत्

पूरा अध्याय