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महाभारत 63.1

धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधन विजानीहि यत्त्वां वक्ष्यामि पुत्रक
उत्पथं मन्यसे मार्गमनभिज्ञ इवाध्वगः

पूरा अध्याय