ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 5757.21महाभारत 57.21प्रतीपमिव मे भाति युयुधानेन भारती व्यस्ता सीमन्तिनी त्रस्ता प्रमृष्टा दीर्घबाहुनापिछलाअगलापूरा अध्याय