ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 5656.36महाभारत 56.36दुर्योधन उवाच उभौ स्व एकजातीयौ तथोभौ भूमिगोचरौ अथ कस्मात्पाण्डवानामेकतो मन्यसे जयम्पिछलाअगलापूरा अध्याय