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महाभारत 55.11

यथाग्निधूमो दिवमेति रुद्ध्वा; वर्णान्बिभ्रत्तैजसं तच्छरीरम्
तथा ध्वजो विहितो भौवनेन; न चेद्भारो भविता नोत रोधः

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