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महाभारत 47.96

अनालब्धं जृम्भति गाण्डिवं धनु;रनालब्धा कम्पति मे धनुर्ज्या
बाणाश्च मे तूणमुखाद्विसृज्य; मुहुर्मुहुर्गन्तुमुशन्ति चैव

पूरा अध्याय