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महाभारत 47.63

वव्रे चाहं वज्रहस्तान्महेन्द्रा;दस्मिन्युद्धे वासुदेवं सहायम्
स मे लब्धो दस्युवधाय कृष्णो; मन्ये चैतद्विहितं दैवतैर्मे

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