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महाभारत 44.19

सनत्सुजात उवाच
नाभाति शुक्लमिव लोहितमिव; अथो कृष्णमायसमर्कवर्णम्
न पृथिव्यां तिष्ठति नान्तरिक्षे; नैतत्समुद्रे सलिलं बिभर्ति

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