Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 43.11

संभोगसंविद्द्विषमेधमानो; दत्तानुतापी कृपणोऽबलीयान्
वर्गप्रशंसी वनितासु द्वेष्टा; एतेऽपरे सप्त नृशंसधर्माः

पूरा अध्याय