ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 3939.5महाभारत 39.5न स क्षयो महाराज यः क्षयो वृद्धिमावहेत् क्षयः स त्विह मन्तव्यो यं लब्ध्वा बहु नाशयेत्पिछलाअगलापूरा अध्याय