ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 3939.12महाभारत 39.12निवर्तमाने सौहार्दे प्रीतिर्नीचे प्रणश्यति या चैव फलनिर्वृत्तिः सौहृदे चैव यत्सुखम्पिछलाअगलापूरा अध्याय