महाभारत 30.29
स एव भक्तः स गुरुः स भृत्यः; स वै पिता स च माता सुहृच्च
अगाधबुद्धिर्विदुरो दीर्घदर्शी; स नो मन्त्री कुशलं तात पृच्छेः
स एव भक्तः स गुरुः स भृत्यः; स वै पिता स च माता सुहृच्च
अगाधबुद्धिर्विदुरो दीर्घदर्शी; स नो मन्त्री कुशलं तात पृच्छेः