ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 195195.19महाभारत 195.19विराटद्रुपदौ चोभौ भीष्मद्रोणसमौ युधि स्वयं चापि समर्थोऽसि त्रैलोक्योत्सादने अपिपिछलाअगलापूरा अध्याय