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महाभारत 192.6

संबन्धकं चैव समर्थ्य तस्मि;न्दाशार्णके वै नृपतौ नरेन्द्र
स्वयं कृत्वा विप्रलम्भं यथाव;न्मन्त्रैकाग्रो निश्चयं वै जगाम

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