ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 192192.30महाभारत 192.30यावदेव स राजा वै नोपयाति पुरं मम तावदेव महायक्ष प्रसादं कुरु गुह्यकपिछलापूरा अध्याय