ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 184184.10महाभारत 184.10न त्वां रामो रणे जेता जामदग्न्यः कथंचन त्वमेव समरे रामं विजेता भरतर्षभपिछलाअगलापूरा अध्याय