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महाभारत 183.16

हयाश्च मे संगृहीतास्तया वै; महानद्या संयति कौरवेन्द्र
पादौ जनन्याः प्रतिपूज्य चाहं; तथार्ष्टिषेणं रथमभ्यरोहम्

पूरा अध्याय