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महाभारत 18.25

वैशंपायन उवाच
तत आमन्त्र्य कौन्तेयाञ्शल्यो मद्राधिपस्तदा
जगाम सबलः श्रीमान्दुर्योधनमरिंदमः

पूरा अध्याय