ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 177177.18महाभारत 177.18कार्यमेतन्महद्ब्रह्मन्काशिकन्यामनोगतम् गमिष्यामि स्वयं तत्र कन्यामादाय यत्र सःपिछलाअगलापूरा अध्याय