Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 172.16

भजस्व मां विशालाक्ष स्वयं कन्यामुपस्थिताम्
अनन्यपूर्वां राजेन्द्र त्वत्प्रसादाभिकाङ्क्षिणीम्

पूरा अध्याय