ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 170170.22महाभारत 170.22अतोऽहं ताश्च कन्या वै भ्रातुरर्थाय भारत तच्च कर्म महाबाहो सत्यवत्यै न्यवेदयम्पिछलापूरा अध्याय