ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 1717.16महाभारत 17.16एवं भ्रष्टो दुरात्मा स देवराज्यादरिंदम दिष्ट्या वर्धामहे शक्र हतो ब्राह्मणकण्टकःपिछलाअगलापूरा अध्याय