ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 155155.10महाभारत 155.10रुक्मी तु विजयं लब्ध्वा धनुर्मेघसमस्वनम् विभीषयन्निव जगत्पाण्डवानभ्यवर्ततपिछलाअगलापूरा अध्याय