ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 146146.14महाभारत 146.14नाहं त्वत्तोऽभिकाङ्क्षिष्ये वृत्त्युपायं जनाधिप यतो भीष्मस्ततो द्रोणो यद्भीष्मस्त्वाह तत्कुरुपिछलाअगलापूरा अध्याय