ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 141141.34महाभारत 141.34पाण्डुरं गजमारूढो गाण्डीवी स धनंजयः त्वया सार्धं हृषीकेश श्रिया परमया ज्वलन्पिछलाअगलापूरा अध्याय