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महाभारत 139.54

तदत्र पुण्डरीकाक्ष विधत्स्व यदभीप्सितम्
यथा कार्त्स्न्येन वार्ष्णेय क्षत्रं स्वर्गमवाप्नुयात्

पूरा अध्याय