ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 133133.26महाभारत 133.26यस्य प्रागेव विदिता सर्वार्थानामनित्यता नुदेद्वृद्धिसमृद्धी स प्रतिकूले नृपात्मजपिछलाअगलापूरा अध्याय