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महाभारत 131.4

विदुरा नाम वै सत्या जगर्हे पुत्रमौरसम्
निर्जितं सिन्धुराजेन शयानं दीनचेतसम्
अनन्दनमधर्मज्ञं द्विषतां हर्षवर्धनम्

पूरा अध्याय