ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 131131.20महाभारत 131.20यस्य वृत्तं न जल्पन्ति मानवा महदद्भुतम् राशिवर्धनमात्रं स नैव स्त्री न पुनः पुमान्पिछलाअगलापूरा अध्याय