ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 127127.23महाभारत 127.23कामक्रोधौ हि पुरुषमर्थेभ्यो व्यपकर्षतः तौ तु शत्रू विनिर्जित्य राजा विजयते महीम्पिछलाअगलापूरा अध्याय