ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 122122.32महाभारत 122.32त्रिवर्गयुक्ता प्राज्ञानामारम्भा भरतर्षभ धर्मार्थावनुरुध्यन्ते त्रिवर्गासंभवे नराःपिछलाअगलापूरा अध्याय