ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 122122.1महाभारत 122.1धृतराष्ट्र उवाच भगवन्नेवमेवैतद्यथा वदसि नारद इच्छामि चाहमप्येवं न त्वीशो भगवन्नहम्अगलापूरा अध्याय