Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 121.7

चतुष्पादस्त्वया धर्मश्चितो लोक्येन कर्मणा
अक्षयस्तव लोकोऽयं कीर्तिश्चैवाक्षया दिवि
पुनस्तवाद्य राजर्षे सुकृतेनेह कर्मणा

पूरा अध्याय