ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 120120.1महाभारत 120.1नारद उवाच प्रत्यभिज्ञातमात्रोऽथ सद्भिस्तैर्नरपुंगवः ययातिर्दिव्यसंस्थानो बभूव विगतज्वरःअगलापूरा अध्याय