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महाभारत 103.36

वैशंपायन उवाच
दुर्योधनस्तु तच्छ्रुत्वा निःश्वसन्भृकुटीमुखः
राधेयमभिसंप्रेक्ष्य जहास स्वनवत्तदा

पूरा अध्याय