ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 103103.26महाभारत 103.26स विष्णुं शिरसा पक्षी प्रणम्य विनतासुतः विचेता विह्वलो दीनः किंचिद्वचनमब्रवीत्पिछलाअगलापूरा अध्याय