ग्रंथमहाभारतविराटपर्वअध्याय 6363.54महाभारत 63.54न मृष्याद्भृशसंक्रुद्धो मां दृष्ट्वैव सशोणितम् विराटमिह सामात्यं हन्यात्सबलवाहनम्पिछलापूरा अध्याय