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महाभारत 61.28

स देवदत्तं सहसा विनाद्य; विदार्य वीरो द्विषतां मनांसि
ध्वजेन सर्वानभिभूय शत्रू;न्स हेमजालेन विराजमानः

पूरा अध्याय