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महाभारत 60.1

वैशंपायन उवाच
भीष्मे तु संग्रामशिरो विहाय; पलायमाने धृतराष्ट्रपुत्रः
उच्छ्रित्य केतुं विनदन्महात्मा; स्वयं विगृह्यार्जुनमाससाद

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