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महाभारत 49.17

प्रकीर्णपर्णानि यथा वसन्ते; विशातयित्वात्यनिलो नुदन्खे
तथा सपत्नान्विकिरन्किरीटी; चचार संख्येऽतिरथो रथेन

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