ग्रंथमहाभारतविराटपर्वअध्याय 3636.2महाभारत 36.2समवेतान्कुरून्यावज्जिगीषूनवजित्य वै गाश्चैषां क्षिप्रमादाय पुनरायामि स्वं पुरम्पिछलाअगलापूरा अध्याय