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महाभारत 35.1

वैशंपायन उवाच
स तां दृष्ट्वा विशालाक्षीं राजपुत्रीं सखीं सखा
प्रहसन्नब्रवीद्राजन्कुत्रागमनमित्युत

पूरा अध्याय