ग्रंथमहाभारतविराटपर्वअध्याय 3232.46महाभारत 32.46ततो युधिष्ठिरो मत्स्यं पुनरेवाभ्यभाषत प्रतिनन्दामि ते वाक्यं मनोज्ञं मत्स्य भाषसेपिछलाअगलापूरा अध्याय