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महाभारत 32.1

वैशंपायन उवाच
तमसाभिप्लुते लोके रजसा चैव भारत
व्यतिष्ठन्वै मुहूर्तं तु व्यूढानीकाः प्रहारिणः

पूरा अध्याय