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महाभारत 31.1

वैशंपायन उवाच
निर्याय नगराच्छूरा व्यूढानीकाः प्रहारिणः
त्रिगर्तानस्पृशन्मत्स्याः सूर्ये परिणते सति

पूरा अध्याय