ग्रंथमहाभारतविराटपर्वअध्याय 1717.3महाभारत 17.3पार्थिवस्य सुता नाम का नु जीवेत मादृशी अनुभूय भृशं दुःखमन्यत्र द्रौपदीं प्रभोपिछलाअगलापूरा अध्याय