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महाभारत 95.1

लोमश उवाच
यदा त्वमन्यतागस्त्यो गार्हस्थ्ये तां क्षमामिति
तदाभिगम्य प्रोवाच वैदर्भं पृथिवीपतिम्

पूरा अध्याय