ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 8383.57महाभारत 83.57ततो गच्छेत राजेन्द्र भर्तृस्थानमनुत्तमम् यत्र देवो महासेनो नित्यं संनिहितो नृपःपिछलाअगलापूरा अध्याय