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महाभारत 82.22

प्रदक्षिणमुपावृत्य गच्छेत भरतर्षभ
धारां नाम महाप्राज्ञ सर्वपापप्रणाशिनीम्
तत्र स्नात्वा नरव्याघ्र न शोचति नराधिप

पूरा अध्याय